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drarvinddubey


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कछुआ और हंस

Posted On: 18 May, 2012  
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विनाशाय लंगोटिया यारानाम्

Posted On: 28 Jan, 2012  
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दूध के दांत

Posted On: 21 Jan, 2012  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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ग्लोबल वार्मिग

Posted On: 21 Jan, 2012  
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Others टेक्नोलोजी टी टी में

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अरे तू तो बेटी है

Posted On: 20 Jan, 2012  
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तेरी भी वाह-वाह, मेरी भी वाह-वाह

Posted On: 20 Jan, 2012  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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तेरी भी वाह-वाह, मेरी भी वाह-वाह

Posted On: 20 Jan, 2012  
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विसर्जन

Posted On: 30 May, 2011  
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ग्लानि बोध

Posted On: 8 Apr, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

बच्चे देश का भविष्य होते हैं पर एक बालिका तो इस भविष्य की भी मां होती है। उसकी की कोख से जन्म लेता है राष्ट्र का भविष्य….. उसी की गोद में खेलती है, राष्ट्र की प्रगति और वही है जो अपने रक्त से सींचती है, देश की इस आशा को। यदि आप को भारत के भविष्य की चिन्ता है तो भारत की बालिकाओं पर ध्यान दीजिये,.. प्रिय डॉ अरविन्द दूबे जी बहुत सुन्दर विषय और सार्थक लेख आप का सराहनीय ..हम पूरी तरह से आप का समर्थन करते हैं ...लेकिन लोग आज बेटियों को पालने जन्म देने से कतराने लगे हैं कई कारण हैं मुख्य असुरक्षा , दहेज़ दानव , जिनके विषय में कानून होते हुए भी सब लाचार हैं एक ईमानदारी से कमाने खाने वाला बेचारा बेतिओयों के लिए लाखों लाख कहाँ से लाये की उसे विदा करे इज्जत बचाए इस समाज से ..बेटियाँ निःसंदेह आज पढ़ लिख रही हैं सब काम कर रही हैं लेकिन हैं तो बेटियाँ ही न ..बहुत कुछ सुधर की जरुरत है ... भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5




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